महात्मा गांधी के 32 महान विचार। Mahatma Gandhi Thoughts in Hindi

हमारे भारत देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का त्याग करने वाले महान क्रांतिकारियों मे से एक Mahatma Gandhi जिन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर हमारे भारत देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराया। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 मे गुजरात के पोरबंदर मे हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। और उनकी मृत्यु 30 जनवरी, 1948 मे हुई थी। आज हम इस पोस्ट मे Mahatma Gandhi के कुछ महत्वपूर्ण महान विचारोंकों के बारे मे जान लेंगे।

महात्मा गांधी के 32 महान विचार। Mahatma Gandhi Thoughts

खुद मे वो बदलाव लाइये जो आप दुनिया मे देखना चाहते है।

जहां पर प्रेम है वही पर जीवन है।

जो भी कुछ आप आज कर रहे हो उसपर आपका भविष्य निर्भर है।

पहले तो वो आपको नज़रअंदाज़ करेंगे, फिर बाद मे आप पर हसेंगे, फिर बाद मे आपके साथ लड़ेंगे, और अंत मे जीत आपकी ही होगी।

अपनी बुराई हमेशा सुने, अपनी तारीफ कभी मत सुने।

ताकत शारीरिक क्षमता से नहीं आती वो तो एक अदम्य इच्छाशक्ति से आती है।

पृथ्वी मनुष्य की हर जरूरत को पूरा करती है, लेकिन हर मनुष्य के लालच को नहीं।

जो लोग समय बचाते है, वो लोग साथ मे धन भी बचाते है। और बचाया हुआ धन कमाए हुए धन के बराबर होता है।

विनम्रता से आप सारे जग को हिलाकर रख सकते हो।

जब ठोकर लगती है और दर्द होता है तब मनुष्य कुछ सीख पाता है।

सत्य से बडा कोई भगवान नहीं है।

अगर मौन पर सुधार होता है तो बोलो।

थोडासा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है।

इस दुनिया मे ऐसे लोग है जो इतने भूखे है उन्हे भगवान रोटी के सिवाय किसीमे भी नहीं दिखता।

अगर आपका सामना किसी विरोधी से होता है तो उसे प्यार से जीत लो।

मेरा धर्म तो अहिंसा और सत्य के आधारपर निर्मित है, सत्य ही मेरा भगवान है, और अहिंसा भगवान को पहचान ने का एकमात्र साधन है।

किसी भी समाज की रचना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के इन्कार पर नहीं की जा सकती।

प्रेम के नियम को छोटे बच्चों के माध्यम से ही अच्छी तरह से समझा और सीखा जा सकता है।

अहिंसा एक विश्वव्यापी नियम है जो हर परिस्थितियों मे काम करता है।

पाप और प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करने वालों को दंड तो अवश्य मिलता है।

इतिहास तो शाश्वत युद्धों का एक रेकॉर्ड है, लेकिन हम तो एक नया इतिहास रचने जा रहे है।

असहयोग, लोगों की राय बनाने का सबसे तेज तरीका है।

एक पवित्र मन के लिए सभी मन पवित्र होते है।

किसी भी व्यक्ति को अपने दुश्मन के रूप मे देख ने के लिए, व्यक्ति को पहले खुद का दुश्मन बनाना पडता है।

अहिंसा मेरे विश्वास का पहला लेख है, और मेरे धर्म का आखिरी लेख है।

सत्याग्रह के शब्दकोश मे शत्रु नाम का कोई शब्द नहीं है।

हमारी भयभीतता धैर्य और मन की शांतता का अनुमान लगाती है।

सत्य तो हमारे अंदर की आवाज होती है, जो हमे पूकारती है।

केवल भगवान ही अमर और अविनाशी है।

अदृश्य भगवान और भगवान के चित्र के सामने की गई व्यक्तिगत प्रार्थना बुरी होती है।

भगवान के हजारो नाम है, या फिर वो गुमनाम है।

हमारा सब सोना और आभूषण, ना तो हमारी भूक मीठा सकते है और ना तो हमारी प्यास बुझा सकते है।

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